बड़ी ने दी छोटी को सीख, चाचा बने पार्षद

ग्वालियर। व्यापार मेले के कला रंगमंच पर सांस्कृतिक कार्यक्रमों की श्रृंखला में सैलानियों ने शुक्रवार की शाम एक के बाद एक तीन नाटक देखे। इनमें से दो तो ऐसे नाटक थे, जो पूरी तरह से हास्य की चाशनी में डूबे हुए थे। पहला नाटक बड़ी जिज्जी, दूसरा गज फुट इंच और तीसरा नाटक चाचा टाईम था। 
बड़ी जिज्जीः कम पढ़कर भी अच्छे नंबर लाने पर आया घमंड" alt="" aria-hidden="true" />
मुंशी प्रेमचंद द्वारा लिखित बड़े भाईसाबह की कहानी का नाट्य रूपांतरण है। ये 2 बहन जा-वी और अनेरी के आपसी प्रेम और नोकझौक की कहानी है। जिसमें बड़ी बहन अपनी छोटी बहन को सदैव लाइन पर चलने की सीख देती रहती है। साथ ही उसका ध्यान भी रखती है। छोटी बहन पास होती चली जाती है इससे उसे गुरूर हो जाता है। वो बहन के फेल होने को बहुत हल्के से लेती है। उसको ऐसा लगता है कि बड़ी बहन की इज्जत करना कोई जरूरी नहीं है। समय आने पर में जिज्जी को जवाब भी दे सकती हूं... पर बड़ी बहन छोटी को जीवन का सबक सिखाती है और कहती है कि बड़े-छोटे का जो अंतर है उसे तू क्या खुदा भी बदल नहीं सकता। छोटों को हमेशा बड़ों का सम्मान करना चाहिए। प्रयासों के बाद बड़ी बहन छोटी को सही रास्ते पर ले आती है।
चाचा टाईमः हर गली में कोई एक बनता है हंसी का पात्र
हर मोहल्ले गली, बाजार में एक पात्र ऐसा होता है, जो हंसी का पात्र होता है। ऐसा ही एक रघु चाचा है। जिनकी सड़क के किनारे लेलुन है। ये तब चिढ़ जाते हैं तो जब मोहल्ले के लड़के इनसे टाईम पूछ लेते हैं। इसी तारतम्य में बच्चे इन्हें परेशान कर रहे होते है तो चाचा अपने मित्र स्कूल मास्टर के घर के बरतन फैकने लगते हैं। झगड़ा बहुत बढ़ जाता है, मास्टर की पत्नी चाचा के सर पर बोतल से प्रहार कर देती है मास्टर बेहोश होकर गिर जाता है। मास्टर और उसकी पत्नी घबरा जाते हैं। मास्टर की पत्नी चाचा को उसके असली नाम रघु भैया कहकर पुकारती हैं चाचा खुश होकर उन्हें माफ कर देते हैं, पर मोहल्ले वाले फिर उसे चिड़ाते हैं, चाचा लठ लेकर उन्हें मारने दौड़ता है। इसी बीच सूत्रधार का प्रवेश होता है, अब चाचा से काई बात नहीं, चाचा भावुक होकर बच्चों से लिपट जाते हैं। सब मिलकर चाचा को पार्षद का चुनाव लड़वाते है चाचा जीत जाते है। अंत में पर्दा गिरता है और सूत्रधार बोलता है कि इस तरह किसी को चिढ़ाते नहीं है बहुत से व्यक्तित्व इस कारण से कुण्ठा ग्रस्त हो जाते है...
गज फुट इंचः आज के युग में हिसाब किताब में
केपी सक्सेना के लिखे गए नाटक गज फुट इंच में दिखाया गया कि आधुनिक युग में जब कुछ डिजिटल हो गया है। नाटक का मुख्य पात्र टिल्लू आज भी अपना हिसाब किताब गज फुट में करता है। यह उसका पिछड़ापन नहीं ,बल्कि उसकी सादगी है। आज वास्तविकता में सीधे- सच्चे लोग बेवकूफ माने जाते है। टिल्लू भी एक सीधा सादा इंसान है। जिसकी बात सुनकर हंसी आती है, लेकिन नाटक की मुख्य नायिका जुगनी उसके अंदर के इंसान को पढ़ लेती है और काफी नाटकीयता व हास्यपद स्थिति के पश्चात अंत में जुगनी और टिल्लू की शादी तय हो जाती है। टिल्लू बाद में यह संदेश जनता को देता है कि आजकल की इस भागदौड़ की जिदगी में हंसने के कुछ पल निकाले जा सकते है। हंसना बहुत बड़ी कला है, मगर रुलाने के लिए किसी को एक थप्पड़ मार दो वो काफी है। हंसाने के लिए खुद थप्पड़ मारना पड़ता है। कार्यक्रम से पहले मेला उपाध्यक्ष डाॅ. प्रवीण अग्रवाल,नवीन परांडे, मेहबूब भाई चेनवाले व सुधीर मंडेलिया ने मां सरस्ती की प्रतिमा पर दीप प्रज्जवलित किया।


 



Popular posts
ऐसे आठ लोग आए कोरोना की चपेट में
राशन तो आ रहा, लेकिन लोगों को नहीं मिल रहा दिल्ली सरकार ने केंद्र से पर्याप्त मात्रा में राशन लिए जाने की बात कही है। राशन की दुकानों पर राशन पहुंच रहा है, लेकिन इसके बाद भी सभी जरूरतमंद लोगों तक राशन नहीं पहुंच पा रहा है।
अरविंद केजरीवाल का दावा है कि दिल्ली सरकार 71 लाख लोगों को राशन पहुंचा रही है। इसके अलावा सुबह-शाम को मिलाकर लगभग 16 लाख लोगों को रोजाना तैयार भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है। लेकिन लोगों का कहना है कि अभी भी उन्हें पर्याप्त भोजन और राशन नहीं मिल रहा है।
दिल्ली में राशन बांटने में किया जा रहा है भेदभाव, खाने की गुणवत्ता को लेकर लोग हैं नाराज
जैन ने बताया कि मौजपुर के मोहनपुरी इलाके के मोहल्ला क्लीनिक में डॉक्टर एक महिला के इलाज के दौरान संक्रमित हो गए थे और उनकी रिपोर्ट पॉजिटिव आई थी। ऐसे में यह आदेश दिए गए थे कि 12 मार्च से 18 मार्च के बीच जो लोग मोहल्ला क्लीनिक में इलाज के लिए आए थे, वह खुद को 14 दिनों तक अपने घरों में सुरक्षित रखें या फिर आसपास के स्वास्थ्य अधिकारी को फोन करें। ऐसे में 800 लोगों का पता चला है जो डॉक्टर से इलाज करवाने के लिए पहुंचे थे।